13 August 2018

महाराष्ट्र के क्रांतिकारी 'क्रांतिसिंह'


ब्रिटिश सत्ता से #आज़ादी पाने के लिए भारतीयों ने कई रास्तों, विचारधाराओं और पद्धतियों से कोशिशें कीं. उनमें से तीन-चार पद्धतियों को इतिहास की मुख्यधारा में जगह मिली. जैसे #गाँधीजी की पद्धति, #भगतसिंह की पद्धति, #नेताजी की राह या कुछ मिली-जुली पद्धतियाँ.
महाराष्ट्र में 'क्रान्तिसिंह' के नाम से जाने जानेवाले #नाना_पाटिल महाराष्ट्र में न सिर्फ क्रांतिकारी गतिविधियों के प्रमुख नेता थे, बल्कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती देते हुए सातारा जिले को स्वतंत्र घोषित कर 'प्रति सरकार' नाम से सरकार की स्थापना की. यह सरकार वो सब काम किया करती थी, जिसके करने की उम्मीद किसी लोकतंत्र में सरकार से की जाती थी. यह प्रति सरकार किसानों के लिए कर्ज़, खेती उत्पादन के लिए बाजार की व्यवस्था, किसानों को तंग करनेवाले साहूकारों के लिए सज़ाएं, न्यायालय आदि की व्यवस्था भी करती थी.
समाज में जागृति लाने के लिए लेखकों को पेन्शन और धनराशि मुहैय्या कराई जाती. इस सरकार का नारा था 'हम अपना मुल्क ख़ुद संभाल लेंगे'
विवाह की साधी और दहेजमुक्त पद्धति को नाना पाटिल 'गांधी-विवाह' के नाम से प्रसारित करते थे.
नाना पाटिल ने अपनी सरकार और आज़ाद प्रदेश की रक्षा के लिए "तूफ़ान सेना" नाम से प्रशिक्षित आर्मी (सेना) बनाई थी, जो ब्रिटिश सेना पर न सिर्फ हमले करती थी, बल्कि पोस्ट, टेलिफोन आदि सुविधाओं को बाधित भी करती थी. इस सेना का आज़ाद प्रदेश में अत्यंत आदर था, क्योंकि उन्हें आर्मी प्रशिक्षण के साथ नाना पाटिल ने शाहू महाराज, ज्योतिबा फूले और छत्रपति शिवाजी महाराज के मूल्यों से परिचित करवाया था. #प्रति_सरकार को सामान्य जनता 'पत्री सरकार' कहती थी. जनता का मानना था कि तूफान सेना ब्रिटिश अधिकारियों को अगवा कर उनके तलुवों में 'पत्री' यानी लोहे का टुकड़ा ठोक देती है.
#वारकरी मिजाज़ के नाना पाटिल ने १९२० के आसपास अपनी तलाठी (तहसीलदार जैसे) का पद छोड़कर राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय भाग लेना आरंभ किया. आरंभ में गांधी से प्रभावित नाना पाटिल १९३० के बाद क्रांतिकारी विचारधारा की तरफ मुड़ते चले गए. बाद में वे मार्क्सवाद के राहगीर बने. 'प्रति सरकार' की स्थापना के कारण वे 'मोस्ट वांटेड' रहे होंगे, इसमें दो-राय नहीं. रिकॉर्ड के मुताबिक १९२०-४२ के दौरान वे ८ से १० बार जेल भेजे गए. १९४२-४६ के बीच 'तूफान सेना' की अति-सक्रियता, सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण उन्हें अंडरग्राउंड होना पड़ा. ब्रिटिश सरकार ने उनकी जानकारी देनेवाले को इनाम घोषित किया. उनके घर और ज़मीन को जप्त कर लिया. अज्ञातवास के दौरान ही उनकी माताजी की मृत्यु हुई, पुलिस से बचते हुए उन्होंने अपनी माताजी की अंतिम यात्रा में भाग लिया..
#स्वतंत्रता के बाद #संयुक्त_महाराष्ट्र_आंदोलन में भी उनका सक्रिय सहभाग रहा. स्वातंत्र्योत्तर भारत में 'शेतकरी कामगार पक्ष' (किसान मजदूर पार्टी) और 'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी' के माध्यम से कार्य किया. १९५७ में वे उत्तर सातारा लोकसभा सीट से तो १९६७ में बीड लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. भारतीय लोकतांत्रिक गणराज्य की संसद में #मराठी में भाषण करनेवाले वे पहले सांसद हैं.

क्रान्तिसिंह नाना पाटिल नाना पाटील (३ अगस्त १९००–६ दिसम्बर १९७६)

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